भयंकर शायरी - Solid dangerous shayris

अरे हमें तो अपनों ने लूटा,
गैरों में कहाँ दम था.
मेरी हड्डी वहाँ टूटी,
जहाँ हॉस्पिटल बन्द था.
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मुझे जिस एम्बुलेन्स में डाला,
उसका पेट्रोल ख़त्म था.
मुझे रिक्शे में इसलिए बैठाया,
क्योंकि उसका किराया कम था.
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मुझे डॉक्टरों ने उठाया,
नर्सों में कहाँ दम था.
मुझे जिस बेड पर लेटाया,
उसके नीचे बम था.
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मोबाईल एक मंदीर है,
 Whatsapp उसका दॆवता,
ग्रुप बनाने वाला पुजारी,
 संदॆश भेजनेवाला दानी
पढनेवाला भक्त,
रिप्लाय न करनेवाला मंदीर का भिकारी !
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ईलाका कीसी का भी हो !!
पर धमाका हमारा ही होगा !!!

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